महकमा कहता है कि नहीं मिला धन तो कैसे स्वच्छ होगा जन-जीवन?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस जिले में ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति योजना संचालित है, लेकिन यह योजना यहाँ धराशाई होती नजर आ रही है। इसका कारण बताया जा रहा है कि शासन स्तर से स्वास्थ्य विभाग को इस योजना का बजट ही आवंटित नहीं किया गया है। धनाभाव के चलते यह योजना मूर्त रूप नहीं ले पा रही है।
यहाँ बता दें कि इस योजना के तहत शासन स्तर से प्रत्येक ग्राम पंचायतों को 10-10 हजार रूपए की धनराशि आवंटित करने के लिए बजट स्वास्थ्य महकमें को प्रदान किया जाता है। विभाग द्वारा उक्त धनराशि ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान व ए.एन.एम. के संयुक्त खाते में भेज दिया जाता है, जिससे गाँवों में सफाई, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने के अलावा स्वच्छता से सम्बन्धित अन्य कार्य कराए जाते हैं। यही नहीं गाँव में प्रसव पीड़ित गरीब महिलाओं को स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुँचाने एवं स्वास्थ्य केन्द्र पर स्वास्थ्य सम्बन्धी सामानों की खरीद भी इसी धनराशि से की जा सकती है।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में छः माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से बजट नहीं आवंटित हो सका है। जिससे यह योजना जिले में फ्लाप साबित हो रही है। वहीं बताया गया कि गत वर्ष भी शासन स्तर से 39 लाख के सापेक्ष महज 50 प्रतिशत बजट ही विभाग को प्राप्त हुआ था। बजट के अभाव में गाँवों की स्वच्छता एवं स्वास्थ्य से सम्बन्धित यह महत्वपूर्ण योजना औंधे मुँह नजर आ रही है।