जब-
मेरा एकाकीपन
मेेरे कन्धों पर चढ़कर
व्यतीत की
धुंधली तस्वीरें दिखाता है।
तब-
मेरी दृष्टि
ढक जाती है शून्य में,
मेरा एकाकीपन
घुटन पैदा करता है।।
मैं-
अपने कृत्यों पर
खीझता हूँ।
............ ..............
ऐसी परिस्थिति में
तुम्हीं मुझे याद आते हो।।
मेरा एकाकीपन
मेेरे कन्धों पर चढ़कर
व्यतीत की
धुंधली तस्वीरें दिखाता है।
तब-
मेरी दृष्टि
ढक जाती है शून्य में,
मेरा एकाकीपन
घुटन पैदा करता है।।
मैं-
अपने कृत्यों पर
खीझता हूँ।
............ ..............
ऐसी परिस्थिति में
तुम्हीं मुझे याद आते हो।।
प्रकाश पर्व की ढेरों मंगलकामनाओं के साथ तुम्हारा...............
-भूपेन्द्र
