अम्बेडकरनगर: दास्तान-ए-खाद्य विपणन महकमा (भाग-4)


  • हाकिम के अर्दली से लेकर अन्य सरकारी कर्मचारी भी उपभोग कर रहे हैं गरीबों के हक का अनाज
  • हाकिम के हुक्म की उदूली किसकी हिम्मत जो कर सके
  • हाकिम स्वयं करें खाद्यान्न गोदामों का निरीक्षण


अम्बेडकरनगर जिले के सम्मानित जन और पाठकों! आपको बताना है कि हम इस बार के वाइरल अंक में खाद्य विपणन महकमा के उस भारी संकट के बारे में बतायेंगे जो हमें सुपुष्ट सूत्रों से ज्ञात हुआ है। ट्रेलर के तौर पर.........जानें कि प्रत्येक गोदामों से विभाग के जिम्मेदारों द्वारा जिला प्रशासन/स्थानीय प्रशासन के चतुर्थ श्रेणी से लेकर द्वितीय श्रेणी तक के कर्मियों, मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ता और अपने खासम-खास को प्रतिमाह सैकड़ांे बोरी खाद्यान्न दिया जाता है, और उनका यह कहना होता है कि ऐसा हाकिमों का हुक्म है। 
हाकिम के हुक्म की उदूली किसकी हिम्मत जो कर सके। यह जानकारी हमें जिस सूत्र से मिली है उसका कहना है कि उक्त गोपनीय बातें उसे जिले के कई खाद्यान्न गोदामों के जिम्मेदार ओहदेदारों (विपणन निरीक्षक और विपणन सहायक) ने बताईं हैं। इस तरह यदि देखा जाये तो सैकड़ों बोरी खाद्यान्न सरकारी मुलाजिम (प्रशासनिक, राजस्व, विकास, पूर्ति, विपणन, पुलिस एवं अन्य विभागों के कर्मी), समाजसेवी, मीडियाकर्मी, राजनैतिक लोग ही प्रतिमाह उपभोग कर रहे हैं। यदि यह बात सत्य है तो अत्यन्त शोचनीय स्थिति है। खाद्य विपणन महकमे के विपणन निरीक्षक और विपणन सहायकों ने जो बात बताई है उसके सच पाये जाने या पुष्टि होने पर प्रशासन के हाकिम की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकता है। इसकी भी जाँच होनी चाहिए। 
दूध का दूध और पानी का पानी होना आवश्यक है क्योंकि यह मामला गरीबों के निवाले से जुड़ा हुआ है। अर्दली हो या हाकिम हैं तो सभी वेतनभोगी सरकारी मुलाज़िम। इन्हें क्या हक है कि गरीबों का निवाला उनसे छीनें.......। और हाकिम/हाकिमों को भी नहीं चाहिए कि इस तरह का मौखिक हुक्म दें। यदि यह बात मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के जिम्मेदारों द्वारा स्वयं के बचाव के लिए या स्वहितार्थ कही जाती हैं तो जिले के हाकिम इस पर गम्भीर हों और इसकी विधिवत जाँच करायें। बेहतर यह होगा कि खाद्य गोदामों का ये स्वयं निरीक्षण करें। क्रमशः........

भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी, 9125977768

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