अम्बेडकरनगर (उ.प्र.)। कोरोना काल को हर कोई अपने जीवित रहते नहीं भूल सकता। वैसे भी यह अवधि इतिहास के पन्नों अवश्य ही आने वाली पीढ़ी को पढ़ने को मिलेगी। वैश्विक महामारी कोविड-19, कोरोना वायरस, लाकडाउन आदि शब्द इस समय इतने प्रचलित हो गये हैं कि बगैर इनके किसी भी प्रकार का आलेख शुरू ही नहीं किया जा सकता। ठीक उसी अन्दाज में हम भी जब कलम उठाते हैं तो जिले का एक ही महकमा बार-बार याद आता है और तब ऐसे में इसके बारे में लिखना भी जरूरी हो जाता है। जी हाँ 15 अप्रैल से जिले में विभिन्न एजेन्सियों द्वारा 40 केन्द्रों पर गेहूँ खरीद शुरू की गई है। खरीद एजेन्सियों और फूड मार्केटिंग महकमा के ओहदेदारों का रूतबा बुलन्द है। गेहूँ उत्पादक किसानों की पीड़ा इस समय यही है कि उनका उत्पाद आसानी से क्रय केन्द्रों पर क्रय नहीं किया जाता। अन्नदाता भगवान होता है, उसकी हालत ठीक उसी तरह हो गई है जैसे भगवान श्री रामचन्द्र अनुज और उनकी धर्मपत्नी माता सीता की अयोध्या में।
जी हाँ! धरती चीर कर पसीने से सींचकर एन-केन-प्रकारेण अन्न उपजाने वाला अन्नदाता किसान जिसे भगवान विष्णु कहा जाना चाहिए वह फूड मार्केटिंग विभाग के मुलाज़िमों के चक्कर काट रहा है। बता दें कि बीते महीने हमें पता चला था कि फूड मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के एक जाति के छः अधिकारी नौकरी का परित्याग कर सत्ता पक्षीय पार्टी ज्वाइन करना चाहते हैं। इस समय उसी संदर्भ में हमें बताया गया कि 6 सवर्ण जाति के अधिकारी लाकडाउन तृतीय चरण में घूसखोरी व मनमानी की पराकाष्ठा को पार कर चुके हैं और विशुद्ध रूप से कफन खसोट की तरह किसानों की चमड़ी उधेड़ ले रहे हैं। इन मार्केटिंग अफसरों की वजह से जिले के किसानों में त्राहि-त्राहि मची हुई है। किसान कोरोना वायरस का भय भूल गया है। उसे तो गेहूँ बेंचने को लेकर पड़ी है। उधर क्रय एजेन्सी एवं केन्द्र प्रभारियों की किरपा इन पर नहीं हो रही है।
फूड मार्केटिंग के आधा दर्जन स्वजातीय सवर्ण जाति के अधिकारी बिचौलियों और मिलर्स, नेताओं, समाजसेवियों, मीडिया, सरकारी मुलाज़िमों को ऑब्लाइज करने में लगे हुए हैं। सूत्रों से पता चला है कि खाद्य विपणन के जिला स्तरीय अधिकारी और ब्लाक स्तरीय वे अधिकारी जिनका ताल्लुक सवर्ण जाति के स्वजातीय व रिश्तेदार राजनेताओं से है जल्द ही प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी ज्वाइन करने वाले हैं। 5 मार्केटिंग इंस्पेक्टर और 1 जिला स्तरीय अधिकारी जो सवर्ण हैं जल्द ही सत्ताधारी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। बताया गया है कि इन सबों ने घूसखोरी का सभी रिकार्ड ध्वस्त करते हुए यहाँ से अकूत कमाई किया है। जिसका 50 फीसदी हिस्सा सत्ताधारी पार्टी के कोष में जा चुका है। चर्चा है कि ये लोग आगामी चुनाव में चयनित जनप्रतिनिधि बनने के लिए अलग-अलग स्वजाति बाहुल्य क्षेत्रों से पार्टी प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ेंगे। खबरीलाल जो हमारे व्यक्तिगत मीडिया के हृष्ट-पुष्ट सूत्र हैं ने बताया कि फूड मार्केटिंग मुलाज़िम ने समस्याओं से ग्रस्त कुबड़ा बने किसानों की कमर तोड़ने के साथ-साथ ही गेहूँ क्रय करने की अवधि में उन्हें धराशाई कर दिया। लिखना तो बहुत कुछ है बहरहाल हर भुक्तभोगी खाद्य विपणन महकमे और इसके मुलाज़िमों के बारे में बेहतर जानता होगा।
शौकीन मिजाज, सुख-सुविधा भोगी, वातानुकूलित वाहनों में चलने वाले, भव्य-भवनों में रहने वाले फूड मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के ओहदेदार जल्द ही राजनीति के माध्यम से समाजसेवा का स्वांग करने वाले हैं। थोड़ी सी प्रतीक्षा, थोड़ा इन्तजार...........। खबरीलाल ने बताया कि इन सवर्ण स्वजातीय अधिकारियों के राजनीति में शामिल होने की खबर जैसे ही हमारे यहाँ के अन्य जाति के (विजातीय) फूड मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के ओहदेदारों को मिली वह लोग अति प्रसन्न हुए। इसके पीछे यह कारण बताया गया है कि इन आधा दर्जन ओहदेदारों से अन्य जाति के समकक्षीय विभागीय ओहदेदार ऊब गये हैं। फूड मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के सवर्ण जाति के ओहदेदारों का रवैय्या अन्य जाति के विभागीय मुलाज़िमों के साथ उपेक्षापूर्ण बताया जाता है। बताया गया है कि ये लोग खाद्य गोदाम से लेकर खरीद बोरी, ट्रान्सपोर्टेशन, क्रय केन्द्रों पर मनमाना, मिलर्स-बिचौलियों से याराना, अफसर, नेताओं, मीडिया, समाजसेवियों को अपनी लूट-खसोट में भागीदार बनाने की कला में माहिर हैं। इसीलिए अपने बचाव हेतु ये लोग नीचे से लेकर ऊपर तक मैनेज कर लेते हैं। अन्य जाति के विभागीय मुलाज़िमों को घास नहीं डालते हैं।
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