अभी ट्विटर पर देखा #yogiadityanath ट्रेंड कर रहा था सोचा एक नजर मार लेता हूँ तमाम शुभकामनाओ के बीच देखने पर पता चला की यहाँ तो एक युद्ध छिड़ हुआ है कुछ प्रबुद्ध लोग भयाक्रांत थे की क्या होगा, एक ने तो उनके आपराधिक रिकॉर्ड का व्योरा तक पोस्ट किया था।
और एक महाशय थे जिन्होंने लिखा था कि ये “लोकतंत्र का कत्ल है” मुझे ये समझ में नहीं आता की ये लोकतंत्र है क्या मैंने जो थोड़ा बहुत पढ़ा है इसका सरल भाषा में मतलब होता है “जनता की व्यवस्था” या “जनता की सरकार” तो इस हिसाब से जनता ने जिसे वोट दिया वह जीता तो इसमें लोकतंत्र की हत्या कहा है?
खैर छोड़िये ये उनकी व्यक्तिगत राय थी इस से मुझे या किसी को कोई आपत्ति नही होनी चाहिए। सबसे ज्यादा बात जिससे आपत्ति हुयी वो थी “2019 तक राम मंदिर के लिए फिर से दंगे होने की तैयारी” मुझे ये बात नहीं समझ आती की आखिर कब तक हम लोग इस मंदिर मस्जिद के लिए दंगे और झगड़ों का दंश सहेंगे।
राम मंदिर हिन्दुओ की भावनाओं से जुड़ा है और शायद ये एक ऐसा मुद्दा भी है जिस पर बहुत सी राजनैतिक रोटियां सेकी जा चुकी है तो अब इस सब मुद्दों से ऊपर उठकर विकास शिक्षा आदि के बारे में सोचना चाहिए।
प्रदेश में नयी सरकार आने से प्रदेश की जनता में जो उम्मीद की किरण जागी है उसे इन दंगों और मंदिर मस्जिद के मामलो में लपेट कर बुझने न दें। जबकि नयी सरकार बहुमत में हो तो ऐसे में निर्णय मजबूती के साथ लिए जा सकते है।
सरकार आपकी है तो आपके साथ ही होगी आपने उन्हें चुना है तो आपको भरोसा भी रखना होगा। बस अब देखम ये है कि प्रदेश में बढ़ी हुई बेरोजगारी भ्रस्टाचार से लड़ने के लिए ये सरकार कितना सफल होती है और माननीय मुख्यमंत्री जी इन मामलो में कितनी कठोरता से फैसले लेते हैं।
और एक महाशय थे जिन्होंने लिखा था कि ये “लोकतंत्र का कत्ल है” मुझे ये समझ में नहीं आता की ये लोकतंत्र है क्या मैंने जो थोड़ा बहुत पढ़ा है इसका सरल भाषा में मतलब होता है “जनता की व्यवस्था” या “जनता की सरकार” तो इस हिसाब से जनता ने जिसे वोट दिया वह जीता तो इसमें लोकतंत्र की हत्या कहा है?
खैर छोड़िये ये उनकी व्यक्तिगत राय थी इस से मुझे या किसी को कोई आपत्ति नही होनी चाहिए। सबसे ज्यादा बात जिससे आपत्ति हुयी वो थी “2019 तक राम मंदिर के लिए फिर से दंगे होने की तैयारी” मुझे ये बात नहीं समझ आती की आखिर कब तक हम लोग इस मंदिर मस्जिद के लिए दंगे और झगड़ों का दंश सहेंगे।
राम मंदिर हिन्दुओ की भावनाओं से जुड़ा है और शायद ये एक ऐसा मुद्दा भी है जिस पर बहुत सी राजनैतिक रोटियां सेकी जा चुकी है तो अब इस सब मुद्दों से ऊपर उठकर विकास शिक्षा आदि के बारे में सोचना चाहिए।
प्रदेश में नयी सरकार आने से प्रदेश की जनता में जो उम्मीद की किरण जागी है उसे इन दंगों और मंदिर मस्जिद के मामलो में लपेट कर बुझने न दें। जबकि नयी सरकार बहुमत में हो तो ऐसे में निर्णय मजबूती के साथ लिए जा सकते है।
सरकार आपकी है तो आपके साथ ही होगी आपने उन्हें चुना है तो आपको भरोसा भी रखना होगा। बस अब देखम ये है कि प्रदेश में बढ़ी हुई बेरोजगारी भ्रस्टाचार से लड़ने के लिए ये सरकार कितना सफल होती है और माननीय मुख्यमंत्री जी इन मामलो में कितनी कठोरता से फैसले लेते हैं।
